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अन्नपूर्णा व्रत

 माँ अन्नपूर्णा https://youtu.be/1ZrPpvOSxJQ अन्नपूर्णा देवी हिन्दू धर्म में मान्य देवी-देवताओं में विशेष रूप से पूजनीय हैं। इन्हें माँ जगदम्बा का ही एक रूप माना गया है, जिनसे सम्पूर्ण विश्व का संचालन होता है। इन्हीं जगदम्बा के अन्नपूर्णा स्वरूप से संसार का भरण-पोषण होता है। अन्नपूर्णा का शाब्दिक अर्थ है- 'धान्य' (अन्न) की अधिष्ठात्री। सनातन धर्म की मान्यता है कि प्राणियों को भोजन माँ अन्नपूर्णा की कृपा से ही प्राप्त होता है। शिव की अर्धांगनी, कलियुग में माता अन्नपूर्णा की पुरी काशी है, किंतु सम्पूर्ण जगत् उनके नियंत्रण में है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी के अन्नपूर्णाजी के आधिपत्य में आने की कथा बडी रोचक है। भगवान शंकर जब पार्वती के संग विवाह करने के पश्चात् उनके पिता के क्षेत्र हिमालय के अन्तर्गत कैलास पर रहने लगे, तब देवी ने अपने मायके में निवास करने के बजाय अपने पति की नगरी काशी में रहने की इच्छा व्यक्त की। महादेव उन्हें साथ लेकर अपने सनातन गृह अविमुक्त-क्षेत्र (काशी) आ गए। काशी उस समय केवल एक महाश्मशान नगरी थी। माता पार्वती को सामान्य गृहस्थ स्त्री के समान ही अपने घर का मात...

गुरु प्रदोष व्रत कथा

 गुरु प्रदोष व्रत कथा  Guru Pradosh Vrat https://youtu.be/nKqjPdkvK4c पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार इंद्र और वृत्तासुर की सेना में युद्ध छिड़ गया. देवताओं ने दैत्य-सेना को पराजित कर नष्ट कर दिया. जिसे देख वृत्तासुर क्रोधित हो गए और खुद ही युद्ध में आ पहुंचे. वृत्तासुर ने आसुरी माया से उसने विकराल रूप धारण किया, जिसे देख देवता भयभीत हो गुरुदेव बृहस्पति की शरण में पहूंचे. देवताओं की बात सुन, बृहस्पति महाराज बोले- तुम्हें मां पहले वृत्तासुर का वास्तविक परिचय दे दूं. वृत्तासुर बहुत ही तपस्वी और कर्मनिष्ठ है. गंधमादन पर्वत पर घोर तपस्या कर उसने शिवजी को प्रसन्न किया. पूर्व समय में राजा था, जिसका नाम चित्ररथ था. अपने विमान से एक बार कैलाश पर्वत पहुंच, शिवजी के वाम अंग में माता पार्वती को विराजमान देख वह उपहासपूर्वक बोला- ‘हे प्रभो! मोह-माया में फंसे होने के कारण हम स्त्रियों के वशीभूत रहते हैं किंतु देवलोक में ऐसा दृष्टिगोचर नहीं हुआ कि स्त्री आलिंगनबद्ध हो सभा में बैठे.’ चित्ररथ के बात सुनकर भोलेशंकर हंसकर बोले- ‘हे राजन! मेरा व्यावहारिक दृष्टिकोण पृथक है. मैंने मृत्युदाता-कालकूट म...

खरमास दिसम्बर 2021 में कब से

 खरमास / मलमास 2021 दिसम्बर में कब से ! हिंदू धर्म में खरमास का विशेष महत्व माना गया है. खरमास को मलमास के नाम से भी जाना जाता है. खरमास की अवधि एक माह की होती है. खरमास को आध्यात्मि कार्य करने के लिए उत्तम माना गया है. खरमास में धार्मिक कार्य करने से जीवन में आने वाले कष्टों से मुक्ति मिलती है. खरमास को भगवान विष्णु का प्रिय मास भी कहा गया है. https://youtu.be/SXxwJ3zoG1Q खरमास क्या है? ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब जब सूर्य बृहस्पति की राशि धनु राशि या मीन राशि मे प्रवेश करते हैं तो खरमास आरंभ होते हैं. खरमास में मांगलिक कार्य, विवाह और यज्ञोपवित जैखरमास 20से कार्य नहीं किए जाते हैं. खरमास में पूजा पाठ आदि का विशेष महत्व बताया गया है. इस मास में भगवान की उपासना और भजन करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है. Kharmas 2021: सूर्य के धनु राशि में प्रवेश करने के साथ ही 14 दिसंबर से खरमास प्रारंभ हो जाएगा। इसे मलमास भी कहा जाता है। खरमास 14 जनवरी 2021 तक चलेगा। खरमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश आदि मांगलिक कार्य नही किये जाते हैं  । क्या होता है मलमास या खरमास सूर्य जब-जब बृहस्पति की...

लाखों दीपों से जगमगाया काशी

 लाखों दीयों से जगमगाएं बनारस के घाट, जानें काशी में ही क्यों मनाई जाती है देव दिवाली✍️🌹🌹    https://youtu.be/dMrXLy91Ztc  इस वजह काशी में धूमधाम से मनाए जाने की है देव दिवाली की परंपरा कार्तिक पूर्णिमा यानी आज के दिन का सनातन धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन देवता स्वर्ग लोक से उतरकर दीपदान करने पृथ्वी पर आते हैं, इसलिए इस दिन को देव दीपावली के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व दिवाली के 15 दिन बाद कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है। धर्म नगर काशी में इस दिन गंगा स्नान, पूजन, हवन और दीपदान का कार्यक्रम किया जाता है। पूरी काशी को रौशनी से सजाया जाता है और घाटों को दीप जलाकर जगमगाया जाता है। इस सुंदर नजारे को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग काशी आते हैं और इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी आ रहे हैं। लेकिन आखिर काशी में ही क्यों मनाया जाता है देव दीपावली का त्योहार आइए जानते हैं….  देव दीपावली की पहली मान्यता काशी में देव दीपावली मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा है। कथा के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने तारक...

सूर्य ग्रहण 4 दिसम्बर 2021

 सूर्य ग्रहण 4 दिसम्बर की सूतक का समय  ग्रहण कहा कहा दिखाई देगा सम्पूर्ण जानकारी 👇 https://youtu.be/35lymUOw1V4

कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा

 कार्तिक पूर्णिमा कथा ✍️🌹🌹 हिंदू धर्म में पूर्णिमा का खास महत्व होता है। कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को कार्तिक पूर्णिमा कहते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है । इस दिन किए जाने वाले दान-पुण्य समेत कई धार्मिक कार्य विशेष फलदायी होते हैं। पूर्णिमा व्रत का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व माना गया है। पूर्णिमा के दिन व्रत करने से कुंडली में चंद्र प्रबल होता है। वैदिक ज्योतिष के विद्द्वान कहते हैं यदि आपकी कुंडली में चन्द्रमा की महादशा व अन्तर्दशा चल रही है, तो पूर्णिमा व्रत अवश्य करना चाहिए। पूर्णिमा व्रत के दौरान कार्तिक पूर्णिमा व्रत कथा अवश्य पढ़नी चाहिए। कार्तिक पूर्णिमा कथा |  पौराणिक कथा के अनुसार तारकासुर नाम का एक राक्षस था. उसके तीन पुत्र थे- तारकक्ष, कमलाक्ष और विद्युन्माली. भगवान शिव के बड़े पुत्र कार्तिक ने तारकासुर का वध किया। अपने पिता की हत्या की खबर सुन तीनों पुत्र बहुत दुखी हुए. तीनों ने मिलकर ब्रह्माजी से वरदान मांगने के लिए घोर तपस्या की ब्रह्माजी तीनों की तपस्या से प्रसन्न हुए और बोले कि मांगों क्या वरदान मांगना चाहते हो. ...

काशी की देव दीपावली

 जरूर देखें देव दीपावली #काशी 15 लाखों दीपों से जगमगाया  #बनारस👇 https://youtu.be/dMrXLy91Ztc बनारस की देव दीपावली

जरूर देखें देव दीपावली #काशी 15 लाखों दीपों से जगमगाया #बनारस👇 https://youtu.be/dMrXLy91Ztc